क़दम-ब-क़दम रहनुमाई
इहराम से लेकर तवाफ़-ए-विदा तक, हर अरकान आसान ज़बान में, सही वक़्त पर।
بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
अल्लाह के घर की तरफ़ एक सफ़र — सुकून से, साथ में।
🎧 तलबिया की आवाज़ धीमी गूंजेगी — आप कभी भी बंद कर सकते हैं
HAJJCARE · HAJCARE AI
हर क़दम पर रहनुमाई, हर दुआ आपके पास, और आपके अपने हमेशा साथ — ताकि आपका दिल सिर्फ़ इबादत में लगे।
सफ़र शुरू करेंतलबिया · التلبية
اللهُ أَكْبَرُ، اللهُ أَكْبَرُ
لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ، لَبَّيْكَ لَا شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ
إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ، لَا شَرِيكَ لَكَ
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर। लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक, लब्बैका ला शरीका लका लब्बैक, इन्नल हम्दा वन्-निअ'मता लका वल-मुल्क, ला शरीका लक।
“हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह, मैं हाज़िर हूँ। हाज़िर हूँ, तेरा कोई शरीक नहीं, मैं हाज़िर हूँ। बेशक सारी तारीफ़, सारी नेमतें और सारी बादशाहत तेरी ही है — तेरा कोई शरीक नहीं।”
हजकेयर क्यों
इहराम से लेकर तवाफ़-ए-विदा तक, हर अरकान आसान ज़बान में, सही वक़्त पर।
परिवार के साथ सफ़र की जानकारी साझा करने और हिफ़ाज़त का इत्मीनान देने के लिए बनाया गया।
हर मक़ाम की मसनून दुआएँ — अरबी, उच्चारण और मायने के साथ।
अनजान ज़बान में भी बात समझने और समझाने में सहारा — AI की मदद से।
* यह डेमो प्रिव्यू है; फ़ीचर्स का विवरण सामान्य है।
मुक़द्दस सफ़र
नीयत और सादगी — दुनिया की पहचान उतार कर बंदगी का लिबास।
काबा के गिर्द सात चक्कर — दिल अपने मरकज़ की तरफ़ लौटता है।
सफ़ा और मरवा के बीच — हज़रत हाजरा के भरोसे की याद।
ख़ेमों की बस्ती में ठहराव, ज़िक्र और तैयारी।
हज का दिल — दुआ, आँसू और माफ़ी की उम्मीद।
खुले आसमान तले रात, और कंकरियाँ चुनना।
जमरात पर रमी, क़ुर्बानी, और नई शुरुआत की निशानी।
अल्लाह के घर से रुख़सत — दिल वहीं छोड़कर।
दुआएँ
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
रब्बना आतिना फ़िद्दुनिया हसनतन व फ़िल आख़िरति हसनतन व क़िना अज़ाबन्नार
ऐ हमारे रब, हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा। (अल-बक़रह 2:201 — रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच)
لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर
अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं; उसी की बादशाहत और उसी की तारीफ़, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। (अरफ़ा के दिन की बेहतरीन दुआ)
डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ · जल्द आ रहा है / Coming soon (demo)
हज की तैयारी किसी लेक्चर से नहीं, बल्कि 10 सच्चे घरों की 10 कहानियों से शुरू होती है — ऐसी कहानियाँ जिनमें शायद आप अपना घर भी देख लें।
दिल में तड़प एक की, और फ़ैसले की झिझक दूसरे की।
जब हालात और ज़िम्मेदारियाँ बीवी के क़दम रोक लें।
सफ़र का इंतज़ाम हो गया, पर इबादत की समझ अभी बाक़ी है।
“अगले साल” कहते-कहते वक़्त हाथ से फिसलता जा रहा है।
जवानी में हज — जब हिम्मत भी हो और ताक़त भी।
बच्चे, बुज़ुर्ग और घर — इन सब के बीच अल्लाह का बुलावा।
थोड़ी-थोड़ी बचत और बड़ा भरोसा — एक सब्र भरी नीयत।
वहाँ पहुँचकर एहसास हुआ कि तैयारी पहले होनी चाहिए थी।
सुनी-सुनाई बातों ने सही रास्ता धुंधला कर दिया।
एक ख़्वाब जो दिल में रह गया — और उसे पूरा करने की दुआ।
हर कहानी के साथ झिझक भरोसे में, डर सुकून में, और अधूरी नीयत पक्के इरादे में बदलती है। मक़सद यह है कि देखने वाला सिर्फ़ जानकारी लेकर नहीं, बल्कि दिल में अल्लाह के घर की सच्ची तड़प लेकर उठे।
“हज पर जाने से पहले हज को जानना ज़रूरी है। सिर्फ़ सफ़र की तैयारी नहीं, बल्कि इबादत की तैयारी भी ज़रूरी है।”
وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ
“और लोगों में हज का ऐलान कर दो…” (अल-हज 22:27)
الحَجُّ المَبْرُورُ لَيْسَ لَهُ جَزَاءٌ إِلَّا الجَنَّةُ
“हज्ज-ए-मबरूर का बदला जन्नत के सिवा कुछ नहीं।” (बुख़ारी, मुस्लिम)